The Forest Rights Act

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BJP Sarkar Jawab Do! Tens of Thousands Will Join National Andolan For Forest Rights

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Today, the Campaign for Survival and Dignity, a national platform of adivasi and forest dwellers’ organisations, decided on a national Wave of Struggle over the next two weeks against the unjust attack on millions of people whose claims under the Forest Rights Act were rejected.

The Supreme Court’s order to evict over one million claimant families is the direct result of the BJP government’s decision to not say a word in court for the last four hearings. This is only the last step in this government’s consistent sabotage of this law, from May 2014 to the present.

Under the banner “BJP Sarkar Jawab Do!”, mass protests are planned from Feb 26th to March 10th. Each will draw several thousand people:

 

  • On February 26th, Jal Jangal Jeevan Bachao Sajha Manch will be holding a mass rally in Bhopal.

  • On February 28th, Adivasi Chhattra Sanghatan and allied groups will be holding rallies in all districts of Madhya Pradesh.

  • On March 3rd, Sarv Adivasi Samaj and allied groups will be holding a mass rally in Raipur.

  • On March 3rd, a mass protest will be held by Adivasi Patel Sangh in Warla (Badwani district, MP).

  • On March 5th, Jangal Jameen Jan Andolan will be holding a mass rally in Udaipur followed by indefinite dharnas in the tribal districts of Rajasthan.

  • On March 8th, Adivasi Mahasabha will holding a mass rally in Godhra in Gujarat in which thousands of tribals from four districts will join. Subsequent protest will be held for north and south Gujarat as well.

  • On March 8th or 9th, a mass rally will be in Bhubaneshwar.

  • Meetings are being held over the next four days in Maharashtra, Tamil Nadu, Uttarakhand, Jharkhand, and Dadra and Nagar Haveli and mass protests will be held in all these States before March 10th.

Each protest will be accompanied by poster and awareness campaigns about the Central government’s role, and in Chhattisgarh, Maharashtra, Madhya Pradesh and Nagar Haveli the rallies will be accompanied by padayatras in affected areas.

The protests will draw people’s attention to the attack on forest rights that has culminated in Supreme Court order. In particular we will demand:

  • The Central government immediately act to reverse the February 13th order, by any means appropriate, and to ensure that all rejection of claims under the Forest Rights Act are reviewed through gram sabhas (not only by officials).

  • The Central government ensure that, as per law, every village in forest areas in the country receives title to protect and manage their community forest resources, and to use their non-timber forest produce without any conditions or restrictions.

  • All compensatory afforestation and other forestry funds (including Joint Forest Management) should only be utilised under the control of forest welling communities through their gram sabhas.

  • Stop all diversion of forest land for corporate projects without consent of affected gram sabhas and without recognising rights.

  • Ensure that all officials responsible for violating forest rights are prosecuted.

बी जे पी सरकार जवाब दो!दस राज्यों से आये आदिवासी और जंगलवासी  संगठनों के कार्यकर्ताओं नें वन अधिकार के लिये राष्ट्रीय आंदोलन का बिगुल बजायाआदिवासियों व वनों में रहने वाले अन्य बाशिन्दों  के राष्ट्रीय मंच – इज्ज़त से जीने का अधिकार अभियान, की आज बैठक, दिल्ली में सम्पन्न हुई। उच्चतम न्यायालय द्वारा दस लाख से अधिक आदिवासियों व अन्य वन निवासियों, की बेदखली के निर्णय के खिलाफ़ आगामी दो हफ़्तों में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया गया।

उच्चतम् न्यायालय में ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय आने का प्रमुख कारण यह था कि पिछली चार सुनवाइयों में भाजपा सरकार की ओर से आदिवासियों के पक्ष में कुछ नहीं कहा गया।
2014 मई से वन अधिकार मान्यता कानून को ख़त्म करने की कोशिशों में लगी इस सरकार का यह आखिरी खंजर था।
देश के विभिन्न राज्यों से आये कार्यकर्ताओं नें बैठक में तय किया कि 26 फ़रवरी से 10 मार्च तक देशव्यापी जन आंदोलन होंगे –
– 26 फ़रवरी को भोपाल में जल जंगल जीवन बचाओ साझा मंच के नेतृत्व में मोर्चा निकाला जायेगा।
– 28 फ़रवरी को आदिवासी छात्र संगठन व अन्य आदिवासी संगठनों द्वारा मध्य प्रदेश के सभी ज़िलों में मोर्चे निकाल कर ज्ञापन सौंपे जायेंगे।
– 3 मार्च को रायपुर, छत्तीसगढ़ में सर्व आदिवासी समाज व अन्य संगठनों द्वारा रैली निकाली जायेगी।
– 3 मार्च को मध्य प्रदेश के बड़ावनी ज़िले की वरला तहसील में आदिवासी पटेल संघ द्वारा मोर्चा निकाला जायेगा।
– 5 मार्च को उदयपुर, राजस्थान में जंगल ज़मीन जन आंदोलन द्वारा विशाल मोर्चा निकाला जायेगा।
– 8 मार्च को आदिवासी महासभा द्वारा गुजरात के गोधरा शहर में चार ज़िलों के आदिवासियों की महारैली आयोजित होगी। इसके बाद दक्षिण और उत्तर गुजरात में भी मोर्चे निकाले जायेंगे।
– 8 व 9 मार्च को भुबनेश्वर में बड़ी रैली का आयोजन किया जायेगा।
– अगले चार दिनों में महाराष्ट्र, तमिल नाडू, उत्तराखण्ड, झारखण्ड व दादरा नगर हवेली में भी बैठकें की जायेंगीं। 10 मार्च के पहले इन राज्यों में भी राज्य स्तरीय मोर्चे निकाले जायेंगे।सभी आंदोलनों के साथ पर्चे पोस्टरों द्वारा इस बेदखली की कार्यवाही में केन्द्रीय सरकार की लापरवाह भूमिका के बारे में प्रचार किया जायेगा।
ंछत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व नगर हवेली में पदयात्रायें निकाली जायेंगी।
हमारी मांगें हैं कि –
1. फ़रवरी 13 के उच्चतम न्यायालय के आदेश को खारिज करने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा उचित कदम उठाये जायें। वन अधिकार के आंशिक या पूर्ण रूप से निरस्त किये गये दावों को ग्राम सभा द्वारा समीक्षा किया जाये।
2. केन्द्र सरकार सुनिश्चित करे कि वन क्षेत्र के सभी गाॅंवों को उनके वनों को बचाने व प्रबंधन करने के लिये अधिकार पत्र मिले व लघु वन उत्पाद को बिना किसी शर्त व रोक टोक के इस्तेमाल करने दिया जाये।
3. क्षतिपूर्ति वनीकरण, संयुक्त वन प्रबंधन व अन्य वन निधी का उपयोग ग्राम सभा के नियंत्रण में किया जाये।
4. ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी वन भूमि का डायवर्ज़न न किया जाये।
5. उन सभी कर्मचारियों- अधिकारियों पर अपराधिक मुकदमें दर्ज किये जायें जिन्होने किसी तरह भी लोगों के वन अधिकारों का उल्लंघन किया है।

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